जाने

जाने

मानवी त्रैमासिक ई-पत्रिका
साहित्य के प्रति समर्पण और सृजन का एक मंच

आप सभी साहित्यानुरागी, साहित्यसेवी, लेखकों, पाठकों एवं रचनाकारों का मानवी त्रैमासिक ई-पत्रिका अपने साहित्यिक पटल पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करती है।

साहित्य की सेवा में एक प्रयास

मानवी पत्रिका की शुरुआत हिंदी साहित्य की सेवा के रूप में की गई है।

पत्रिका अपने प्रधान संपादक कविता सिंह जी के स्वामित्व एवं देख-रेख में बाबा गोरखनाथ की पवित्र नगरी “गोरखपुर” से प्रकाशित होती है।

प्रधान संपादक कविता सिंह जी स्वयं एक छायावादी कवयित्री हैं और बचपन से ही इनका काव्य के प्रति विशेष रुझान एवं लगाव रहा है।

प्रधान संपादक और साहित्यिक पृष्ठभूमि

इनका बचपन और पढ़ाई-लिखाई भी महादेवी वर्मा, निराला और संगम की धरती इलाहाबाद से हुई है। साहित्य के प्रति इनकी रुचि और लगाव भी इसी धरती की देन है।

पत्रिका के संपादक राजेश सिंह जी भी काव्यप्रेमी हैं और पत्रिका परिवार द्वारा दी गई जिम्मेदारी को पूर्ण मेहनत और लगन के साथ निभाते हैं।

साहित्य से जुड़ने का आमंत्रण

पत्रिका हिंदी साहित्य की इस नि:स्वार्थ सेवा और यज्ञ की आहुति में सभी साहित्यानुरागी प्रेमियों से जुड़ने का अनुरोध करती है।

पत्रिका की शुरुआत जनवरी 2021 से ऑनलाइन त्रैमासिक पत्रिका के रूप में की गई और तब से अनवरत इसका प्रकाशन जारी है।

रचनाएँ आमंत्रित

आप सभी साहित्यनुरागी प्रेमियों एवं साहित्यकारों से “मानवी” त्रैमासिक ई-पत्रिका साहित्य की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ आमंत्रित करती है।

विधाएँ:
कहानी • कथा • लघुकथा • लेख

• निबंध • संस्मरण • यात्रा संस्मरण • हास्य-व्यंग्य

• समीक्षा • गीत • नवगीत • कविता

• नवकविता • दोहा • छंद • मुक्तक

• ग़ज़ल • हास्य कविता आदि।

समसामयिक विषयों पर रचनाओं का भी स्वागत है।

ईमेल:
manvipatrika@gmail.com

रचना भेजने के दिशा-निर्देश

01. रचनाएँ केवल Word File में उपरोक्त ईमेल पर ही भेजें।

02. रचनाएँ Unicode या Kruti Dev फ़ॉन्ट में ही टाइप होनी चाहिए।

03. रचना के साथ एक पासपोर्ट आकार का छवि चित्र, संक्षिप्त परिचय एवं पता भी अवश्य भेजें।

04. रचना भेजने से पहले कृपया प्रयोग किए गए शब्दों की शुद्धता अवश्य जाँच लें।

05. रचना के प्रकाशन एवं रचना में संशोधन का अधिकार संपादक मंडल का होगा। संपादक मंडल का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकर होगा।


अंतिम अपील / प्रकाशन नीति

एक बार में अपनी एक या दो ही उत्कृष्ट रचनाएँ भेजें और पत्रिका के प्रकाशन का इंतजार करें। लगातार रचनाएँ भेजने का कोई तात्पर्य नहीं है।

यह आप सबकी पत्रिका है और सबको प्रकाशित होने का अवसर दें।

मानवी एक अव्यवसायिक, नि:शुल्क ई-पत्रिका है। रचनाकारों को पारिश्रमिक देने का कोई प्रावधान नहीं है।

7. अंतिम अपील / प्रकाशन नीति

जाने